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भारतीय कानून कैसे पुरुषों के साथ भेदभाव करते हैं? How Indian Law's Punish Men's
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भारतीय कानून कैसे पुरुषों के साथ भेदभाव करते हैं? How Indian Law's Punish Men's

आज मैं भारत के कुछ ऐसे कानून के बारे में बताने वाले हैं जिससे आपको जानकर हैरानी होगी कि भारतीय कानून पुरुषों के साथ कितना नाइंसाफी करता है भारत का संविधान जहां भारत के हर सिटीजन को समानता का अधिकार देता है वहीं भारतीय दंड संहिता यानी कि इंडियन पेनल कोड या भारतीय न्याय संहिता को अगर आप गौर से देखेंगे तो आपको साफ दिखाई देगा कि पुरुषों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए तो हर तरह के कानून बने हुए है लेकिन जब बात महिलाओं के द्वारा पुरुषों पर किए गए अपराधों की आती है तो इसी इंडियन पेनल कोड या भारतीय न्याय संहिता के कानून और आर्टिकल अपने कदम पीछे खींच लेते हैं अगर हम घरेलू हिंसा का उदाहरण ले तो ऐसा माना जाता है कि घरेलू हिंसा के 100 केसों में से 40 केस पुरुषों के खिलाफ होते हैं लेकिन कभी भी इस डाटा को सही नहीं ठहराया जा सकता और ऐसा इसलिए कि अधिकतर पुरुष अपने खिलाफ होने वाले घरेलू हिंसा जैसे अपराध को रिपोर्ट ही नहीं करते हैं तो इससे यह बात बिल्कुल सही है कि महिलाओं और पुरुषों के खिलाफ होने वाले घरेलू हिंसा की अपराध की गहराई अलग अलग होती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुषों के खिलाफ होने वाले डोमेस्टिक वायलेंस या घरेलू हिंसा को अपराध ही ना माना जाए ऐसा संभव है कि बहुत से लोगों को यह बात सही ना लगे कि एक शादी या रिलेशनशिप में रहने वाली महिला से ज्यादा पुरुष प्रताड़ित होते हैं और इस बात को 2021 के एनसीआरबी या नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डाटा भी सपोर्ट करता है।

DEEPAK KUMAR PATEL ADVOCATE HIGH COURT ALLAHABAD 7 July 2026
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भारत में श्रम कानून
General Legal

भारत में श्रम कानून

बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार, "बाल" वह व्यक्ति है जिसकी आयु चौदह वर्ष से कम है। इतनी कम उम्र के बच्चे से अपेक्षा की जाती है कि वह खेले, पढ़े और निश्चिंत रहे। लेकिन प्रकृति का नियम है कि अपेक्षाएँ वास्तविकता से मेल नहीं खातीं। बच्चों को उनकी इच्छा या मजबूरी से कठोर परिस्थितियों और वातावरण में काम पर लगाया जाता है, जो उनके जीवन के लिए खतरा बन जाता है। बाल श्रम से अल्पविकास, अपूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास होता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों का विकास रुक जाता है। 2011 की जनगणना से स्पष्ट है कि भारत में बाल श्रमिकों की संख्या 10.1 मिलियन है, जिनमें से 5.6 मिलियन लड़के और 4.5 मिलियन लड़कियाँ हैं। चूंकि बच्चे भारत के भावी युवा हैं, इसलिए उन्हें आश्रय, भोजन और वस्त्र जैसी बुनियादी ज़रूरतों से लेकर शिक्षा और अन्य सामाजिक ज़रूरतों तक सभी आवश्यक चीज़ें उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे प्राप्त करने के लिए, भारत जैसे जटिल समाज में उचित विधायी उपायों की आवश्यकता है। भारत में बाल श्रम की समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। लेख के अंत में आपको भारत के सभी प्रासंगिक कानूनों और नियमों की जानकारी मिल जाएगी।

11 Jun 2026Read
लीगल नोटिस कैसे भेजें
General Legal

लीगल नोटिस कैसे भेजें

यह लेख इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता, श्री दीपक कुमार पटेल, जो कि पटेल लॉ चैंबर्स के संस्थापक और प्रमुख अधिवक्ता भी हैं, के द्वारा तैयार किया गया है। इस विस्तृत आलेख में, कानूनी नोटिस और उसके प्रत्युत्तर को तैयार करने की विस्तृत विधि, उनकी आवश्यक विषय-वस्तु, उन्हें प्रस्तुत करने की औपचारिक प्रक्रिया, तथा विभिन्न प्रकार के कानूनी नोटिसों के मानक प्रारूपों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह लेख कानूनी नोटिस की आधारभूत परिभाषा और उसके मौलिक उद्देश्यों की स्पष्ट एवं व्यापक व्याख्या भी करता है, जिससे पाठकों को इस महत्वपूर्ण कानूनी उपकरण की समग्र समझ प्राप्त हो सके।

10 Jun 2026Read
Cyber Forensics: law and practice in India  
General Legal

Cyber Forensics: law and practice in India  

Cyber forensics is a very important emerging area of evidence law, but very little is understood by the lawyer community about this. This article was written by Saswati Soumya Sahu, a 4th year student from Symbiosis Law School. Over to Saswati. Introduction The surge of technological advances has seemed to challenge the archaic ways of collecting and generating evidence. The intangible nature of digital evidence coupled with the fragile and vulnerable structure of the internet has posed inherent obstacles in collecting and preserving of digital evidence. The dearth of adequate techno-legal skills coupled with lack of expertise in collecting such evidence has undisputedly led to a rise in the cyber-crimes in the nation.

8 Jun 2026Read
F.I.R और Complaint में क्या अंतर है?
Criminal Law

F.I.R और Complaint में क्या अंतर है?

कई लोग FIR और Complaint को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में कानूनी रूप से बड़ा अंतर होता है। सही जानकारी न होने से लोग अपने अधिकारों का सही उपयोग नहीं कर पाते।

5 May 2026Read
New GST Guidelines for Service Providers
Taxation

New GST Guidelines for Service Providers

Stay updated on the latest tax compliance for your business.

14 Apr 2026Read
The Importance of Digital Evidence in 2026
Criminal Law

The Importance of Digital Evidence in 2026

How the latest amendments are changing the way we handle evidence.

14 Apr 2026Read

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